प्रेरणा की रश्मि
चले जब अंधेरे, फिर भी न हो निराश,
उम्मीद की किरण, लाएगी एक खास।
सपने हैं अनमोल, उन्हें कभी न छोड़ो,
बढ़ते जाओ आगे, कभी ना तुम थक जाओ।
हर मुश्किल राह में, है सीख छिपी हुई,
पलट दो कठिनाई को, ये है जीत की कुंजी।
उठो, बढ़ो, चलो, अपने लक्ष्यों की ओर,
खुद पर करो विश्वास, ये है सच्चा जन्मदिवस।
हर बूँद पसीने की, करती है बात ये,
कोशिशों की महक से, बहेगी बहार सारे।
ऊँचाई की ओर, जो तुम रुख करो,
हर विषम राह पर, तुम खुद को खोज लो।
मिलेंगे नए सफ़र, नए अनुभवों के रंग,
प्रेरणा की रश्मि से, छेड़े हर जंग।
तो चलो मिलकर, उजाले की तरफ बढ़ें,
हर दिल में हो जज़्बा, हर कदम में सवेरा।
-कवि लोकेश
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