विरासत में मिलती खामोशी

विराम

तेरे साथ में जो सपने थे,

अब वो सब ख्वाबों में बिखरे हैं।

दिल की गहराइयों में जख्म हैं,

तेरे बिना अब हम कितने अकेले हैं।

साथ जो चले थे, वो राहें अब सूनी,

तेरी हंसी की धुन, अब सूनसान है।

हर लम्हा तेरा याद आता है,

हर मोड़ पर बस तेरा संकेत बाकी है।

बिछड़ने की रात थी बरसात ने,

जो दिल को भिगोया, वो आंसू बन गए।

हमने सोचा था, प्यार की है ये कहानी,

लेकिन वक्त ने बदला, ये फसाना सच्चाई बन गए।

हमने दीवानगी में खोई थी कसम,

अब वो कसम भी लगती है जैसे एक इलज़ाम।

तड़पते हैं हम इस जुदाई में,

पर मिले थे हम, ये भी है एक अनजान।

चल पड़े हैं हम, नई राहों की ओर,

लेकिन ये यादें, हमेशा रहेंगी और।

तू चला गया, पर दिल में है एक खाली जगह,

जिंदगी का यह अध्याय, बस एक विराम सा है।

-कवि लोकेश


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Lokesh T

एक हिंदी कवि के रूप में, मैं अपने शब्दों के माध्यम से जीवन की सुंदरता, जटिलता और बारीकियों को पकड़ने का प्रयास करता हूँ। अभिव्यक्ति की इस यात्रा में मेरे साथ जुड़ें क्योंकि मैं कविता की शक्ति के माध्यम से अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को साझा करता हूँ।

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