बिछड़ने का ये सफर, कितना अधूरा सा है,
तुम्हारे बिना अब ये दिल, बहुत अजीब सा है।
यादों की रेशमी धारियाँ, मन में उठती हैं लहर,
ख्वाबों के महल में अब, खाली सा हर एक त्योहार।
तेरे साथ बिताए लम्हे, जैसे बारिश की बूंदें,
चले गए हो तुम जब से, हर खुशी मुझसे दूर है।
दिल की गहराइयों में, तुम्हारा नाम लिखा है,
पर अब इन यादों के सहारे, जीना भी अधूरा है।
गुलाबों की खुशबू में, तेरा इश्क़ बसा था,
तितलियों के रंगों में, तेरा साथ खिला था।
पर अब ये राहें अलग हैं, और हम भी हैं अकेले,
खुशियों का वो सागर, सूख गया है ये मेले।
क्या तुम भी कभी सोचते हो, वो बातें पुरानी,
जब हंसते-खिलखिलाते, हम थे सिर्फ सयानी।
अब यादों की किताब में, बस एक पन्ना बाकी है,
तुमसे बिछड़कर जान लो, ये दिल फिर भी बेचारा है।
जिंदगी के राहों में, एक नया मोड़ आएगा,
शायद कहीं तुमसे मिलना, फिर से कुछ छाएगा।
पर इस वक्त का हलचल, बस एक सन्नाटा है,
तुम्हारी यादों का जादू, मेरे दिल का ख़ामोश साज है।
-कवि लोकेश
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