अलविदा
दिल की धड़कनें अब थम गईं,
तेरे बिना ये राहें सिमट गईं।
ख्वाबों में बसी थी तेरी हंसी,
अब वो यादें भी मुझसे कट गईं।
हाथों में हाथ था, छूकर भी,
अब लगे जैसे दूरियां भरी हैं।
कारवां में तेरा नाम था,
अब ये लम्हे हैं, जो अधूरी कहती हैं।
हर शाम की तन्हाई मुझसे पूछे,
क्यों तुझसे अब ये फासले हैं?
आँखों में आँसू भरे हैं,
पर दिल में अब भी तेरा बसेरे हैं।
चाँदनी रातें, वो बातें पुरानी,
यादों की किताब में है बस तन्हाई।
संग रहकर भी, तू जैसे खो गया,
अलविदा कहने का ये मौसम अधूरा रहा।
चल पड़े हम, राहें अलहदा,
जिन्दगी अब एक नया सफर ले रही है।
जब कभी मुस्कुराहटों में तेरी परछाई दिखे,
सिर्फ एक याद, एक अलविदा की कहानी रहेगी।
-कवि लोकेश
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