बिछड़ने का दर्द
तेरी यादों का साया, हर पल मेरे संग है,
दिल की गहराइयों में, तेरा नाम ही रंग है।
कुछ लम्हे थे ख्वाबों के, अब बस जख्मों के हैं,
बिछड़ने का ये सफर, अब बेगाना सा रंग है।
तेरे बिना ये शामें, कितनी उदास होती हैं,
हर तारे में तेरा चेहरा, मेरी आँखों से खोती हैं।
मुस्कान तेरी भुला दूं, पर दिल नहीं मानता,
हर एक धड़कन का मोड़, तेरा नाम ही गाता।
आँखों में बसी तस्वीर, मुस्कान की गहराई,
अब तो ये दिल भी कहता, बिछड़ने की करवाई।
कभी तो यादों के सागर में, डूबकर मिलेंगे,
रास्ते जुदा हैं अब, पर मन से तो हम हैं अकेले।
अतीत की दस्तक में, हुए हैं हम खोयें,
तन्हाई की शामों में, किस्से तेरे सुनायें।
जो भी हुआ वो सच था, बस पल का खेल था,
बिछड़ने का सफर है, पर दिल का क्या हाल है।
तेरे बिना ये रुतें, बेजान सी लगती हैं,
हर सुबह की खिलती, फूलों में ताजगी न बचती है।
फिर भी चलते रहेंगे हम, इस गहरी रात में,
बिछड़ने का ये दर्द भी, जीना सिखाता है।
-कवि लोकेश
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