अधूरी यादें
तोड़ दिया जब तुमने मन को,
दिल की गहराइयों में छिपा था प्यार।
सपनों की दुनिया बिखर गई,
छोटी-छोटी खुशियाँ रह गईं बेकार।
तेरी हंसी अब रुलाती है,
आँखों में बसी वो मासूमियत।
खामोशियों से बातें करती हूँ,
हर सांस में है तेरी कमी, ये है नियति।
वो राहें, जहां हमने साथ चले,
अब अकेले चलने का है सफर।
दिल के जख्मों का इलाज नहीं,
आँसू के सागर में खो गया है असर।
दिल तोड़ा तुमने जैसे बूँदें गिरतीं,
जो तन्हाई में चुपके से चुराई।
फिर भी यादों के साये में जीते हैं,
अधूरी ख्वाबों की कश्कों में सजी।
चलो, अब नई राहें चुन लें,
खुद को फिर से संवार लें।
तोड़ दिया जो प्यार से तुम्हारा,
उसे अधूरा रहने का अधिकार दें।
-कवि लोकेश
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