तुम्हें छोड़ना ही पड़ा,
अपनी जिंदगी को देखना ही पड़ा।
तेरे बिना हर पल बेहाल है,
ये अकेलापन सिर्फ मजबूरी है।
तेरे साथ बीती हर रात,
अब वो सब कुछ अवास्ता है।
धड़कनों की आहट भी ग़ायब है,
तनहाई की ये दीवार सामने है।
दिल में छुपा दर्द कैसे बयां करूँ,
तुम्हारे बिना जीना भी आसान नहीं है।
तुम्हारी ख्वाबों में खोई यादें,
अब तनहाई में कतराएं।
फिर से दी जाएं वो प्यार और तिमिर,
इस अलविदा का दर्द सहना ही पड़ा।
-कवि लोकेश
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