तुम से मिल कर जीना कोई सपना था,
पर तुमने तोड़ दिया ये अपना वादा।
मोहब्बत की राहों में हमने हर संध्या बिताई,
पर तुमने चुराया मेरी खुशियों को और बरबाद कर दिया।
तुम्हें घमण्ड है अपने जख्मों का,
पर मेरी तन्हाई में तुम्हें याद करना है अब भी वास्तव।
इस अलविदा का इन्तजार था हमें,
पर तुमने तोड़ दिया दिल का साथ और चले गए।
क्या चाहते हो अब मेरा जिंदगी का,
क्या चाहते हो अब मेरे दर्द का?
बस एक जवाब है मेरे प्यार मे,
कि मैं अब रहूंगी एक अलग जगह।
-कवि लोकेश
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