तुझसे मिलकर खुश थे हम,
पर अब सब कुछ ग़ायब है।
तू चली गई, छोड़कर हमें,
अब दिल में सिर्फ दर्द है।
तेरी यादों का ज़हर जलता है,
हर जगह तेरा ज़िक्र होता है।
दुनिया से मोहब्बत की,
तू हो लेंवादा होता है।
कैसे भूलें तुझे हम दोनों,
तेरे बिना हमारा जीना अधूरा है।
परिंदों की तरह छोड़कर ज़मीन को,
तूने हमारा दिल तोड़ा है।
कितनी रातें गुजारी हमने,
तेरी यादों के साथ सोते हुए।
पर अब वक्त है आगे बढ़ने का,
तेरे बिना हमने नया इक जीने का।
तू चली गई, हमें छोड़कर,
पर तेरी ख़ुशी का ख्याल आता है।
मगर जो अकेले हम रह गए हैं,
उसमें हमारा खोना भी है।
तेरे साथ बिताए हर पल का,
हमें अब बड़ा एहसास होता है।
पर कोई नहीं हमारी भावनाएं समझता,
और तू हमारे बिना हंसती फिरती है।
कैसी थी वो दिन, जब तू हमारे साथ थी,
हर बात का आक्षेप, हर मुसीबत का साथ था।
पर अब तू दूर है, हमारे पास सिर्फ यादें हैं,
क्या कहें, ये दर्द तू ही तो जाती है।
अब दिल करता है रो दूं,
तेरे बिना अब हम कैसे जी पाएंगे।
पर जी लेंगे, जिंदगी के हर मोड़ पर,
क्योंकि तू जैसी कोई और नहीं है।
-कवि लोकेश
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