विच्छेद की तरह (Vichhed ki Tarah)


धीरे-धीरे तोड़ा जुड़ा था,
दिल की दो दिल से जुड़ा था।

बिछड़ने का फैसला करना ही पड़ा,
दिल था मजबूर इसे मनाना ही पड़ा।

क्यों हुआ वो ख़याल दूर,
दिल में ओस थे वो प्यार के चूर।

कभी था जब हम साथ,
आज हमें है विरासत ये ब्रेकअप का हाथ।

फिर भी दिल में बसी है उम्मीद,
शायद वो वक़्त हमारी मुस्कान ले ले गाहत।

ना जाने कब मिलेंगे फिर से,
पर हमारे इस ब्रेकअप ने चली अब हमारी परवाह।

बेवफ़ाई की ना थी हमसे,
फिर भी हमारे बगैर जीना मुश्किल है तुमसे।

वो यादें हैं जो रहेंगी हमेशा,
जब तक चलेगी हमारी सांसों में इस ब्रेकअप की आत्मा।

-कवि लोकेश


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Lokesh T

एक हिंदी कवि के रूप में, मैं अपने शब्दों के माध्यम से जीवन की सुंदरता, जटिलता और बारीकियों को पकड़ने का प्रयास करता हूँ। अभिव्यक्ति की इस यात्रा में मेरे साथ जुड़ें क्योंकि मैं कविता की शक्ति के माध्यम से अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को साझा करता हूँ।

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