विच्छेद की गहराई


तेरे जाने के बाद,
मेरे दिल में बसी उम्मीदें पीछे छूट गईं।
मेरी तन्हाई में तू नहीं था,
मेरी खुशियों में भी तेरी कमी खुद को बताई।

तेरे साथ जीने की आदत थी मुझे,
तेरे बिना अब कैसे चलूं मैं इस राह में।
तेरी यादों ने भर दिया मेरे दिल को दरार,
अहसास होता है कुछ बिखर गया है खोज।

तुझसे बिछड़ने की क्या वजह है,
क्यों छोड़ गए तुम मेरे साथ ये राज समझने में।
प्यार करना था तो छोड़ क्यों गए मुझे,
इस बिस्तरी जिंदगी में क्या मिला है खो गए सर समझने में।

छूट गई है रात और सजावट अब,
तेरी यादों ने जलाई धुंध और कर दी अब मेरी रात तनहाई के जाव।
छोड़ गया है तू मेरी जिंदगी में कुछ भी अधूरा,
इस अलगाव की रात में क्यों है तू छोड़ी मेरी येह दिन का सवाल।

तेरे बिना जीने का अब अद्भूत मौका है,
तू मेरे दिल के एक तुकड़े को छोड़ के तो देख,
मेरे दिल में भी एक जगह तो है जो बसी है तेरे नाम के इंतजार में।

-कवि लोकेश


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Lokesh T

एक हिंदी कवि के रूप में, मैं अपने शब्दों के माध्यम से जीवन की सुंदरता, जटिलता और बारीकियों को पकड़ने का प्रयास करता हूँ। अभिव्यक्ति की इस यात्रा में मेरे साथ जुड़ें क्योंकि मैं कविता की शक्ति के माध्यम से अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को साझा करता हूँ।

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