तुझसे मिलकर हुई थी मोहब्बत कि जुदाई,
धीरे-धीरे तूने मेरे दिल को तोड़ डाला।
अब तक ना जाने कैसी है ये हालात,
तू गया तो जैसे जीना छूट गया।
बिखरी हुई यादों की खुशबू,
अब भी तेरी बातों में बसी है।
मेरे दिल की धड़कनें भी कहती हैं,
तू मुझसे दूर चला गया है।
क्या थी वो गलती जिसके लिए,
तूने मुझसे ये दूरी बढ़ा ली।
तेरे बिना मेरी जिंदगी है अधूरी,
क्या करूँ, कैसे जी सकूँ मैं अब तक मुझे नहीं पता।
तुझसे बचपन से जुड़ी हुई हर याद,
अब भी मेरे दिल में बसी है।
लेकिन तू मेरे साथ नहीं है,
और इस फिर को पर मैं खो रही हूँ।
कैसे भूला सकूँ तेरा प्यार,
कैसे जी सकूँ अब मैं तेरे बिना।
बड़ी मुश्किल सी है ये ज़िंदगी,
जब तू नहीं है तो कुछ भी नहीं है मेरी दुनिया में।
तू कहीं और चला गया है,
मगर मेरे दिल में तेरी यादें बसी है।
अब सच में मुझे एहसास हुआ है,
मोहब्बत में जुदाई की क़दर कितना है।
– एक दिल से बेहाल इंसान
-कवि लोकेश
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