छूट गया है तेरा साथ,
बिखर गए हैं मेरे रात.
तुझसे जुदा होना मुश्किल,
अब सब कुछ लगता है उदास।
तेरे बिना मेरा जीवन अधूरा,
कैसे मिलेगा मुझे एक नया मंजिल?
तुझे खोकर हो गई है टूटी ख्वाहिशें,
कैसे सहूं मैं यह दर्दिल?
तेरी यादों का साथ अब चाहिए नहीं,
मेरी आँखों में बसती हैं सिर्फ तेरी दस्तानें।
हमारी मोहब्बत का अंजाम कुछ ऐसा हो गया,
कि जीने की चाहत अब दिल मे है चौरासी।
यह छूट है सही या गलत,
क्या तेरी तालियां सुनने में कुछ गलत?
मुझे लगता है कि हमारी प्यार की कहानी,
अब खत्म हो गई है इस अजनबी मंजिल की राही।
-कवि लोकेश
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