उड़ गए हैं सपने,
टूट गए हस्तियां,
छूट गई उम्मीदें,
हो गई है ये ब्रेकअप की माध्यम।
दर्द भरी ये रातें,
झूलती हैं तन्हाई,
क्या कहें इस वक्त में,
जो हो गई है तुमसे हमारी ब्रेकअप की साइ।
बीत रही हैं दिन गए,
बर्बाद हुआ है प्यार,
कैसे करें इसे भूल,
क्या होगा हमारा इस ब्रेकअप का प्यार।
अब तो है एक ही रास्ता,
भूलाना है तुझको,
पर कैसे करें ये हम,
जो हो गई है तेरे साथ हमारी ब्रेकअप की बात।
कोई नहीं समझ सकता,
जो है तेरे बिना ये दिन,
क्या करें हम अब इस हाल में,
जो हो गई है तेरे साथ हमारी ब्रेकअप की लिं।
कुछ नहीं रहा है अब,
सिर्फ उदासी है रही है,
कैसे सहें इसे हम,
जो हो गई है तेरे साथ हमारी ब्रेकअप की रात।
मिलते हैं फिर भी दिल,
मगर है कुछ अलग सा,
कैसे मनाएँ हम खुद को,
जो हो गई है तेरे साथ हमारी ब्रेकअप की चह।
-कवि लोकेश
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