तेरे बिना जीना लगता है बेहाल,
मेरे दिल का हर कोना दर्द से भरपूर है।
तू चली गयी मेरी जिंदगी से,
अब लगता है समय रुका है।
तेरी यादों में खोया हूँ मैं,
तेरा नाम मेरे लबों पर है।
क्यों मुजसे तू दूर चली गयी,
क्यों मेरी जिंदगी में आयी सितम्बर की बरसात की तरह।
अब मेरी आँखों में न चमक है,
अब मेरे दिल में खामोशी है।
तेरी चाहत में हर सपना टूटा,
तेरे बिना मैं कैसे जिऊं ये सवाल मेरे मन में है।
अब मेरे दिल का दरवाजा बंद है,
तेरी चाहत के आंसू मेरे आँखों से बह रहे हैं।
ये ब्रेकअप की रातें लंबी हैं,
क्यों उसने मुजसे ये करवाई है।
क्यों मुजसे इतना दर्द दिया है,
अब मैं तेरे बिना कैसे रहूं ये बड़ी सवाल है।
-कवि लोकेश
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