तुम मेरे दिल की धड़कन थी,
मेरी ज़िन्दगी की रौशनी थी।
पर कहाँ गयी वो मुस्कान,
जिसे देखकर खुशी मिलती थी।
क्यों तोड़ दिया तुमने मेरा दिल,
क्यों छोड़ गये मुझे तन्हा हिलाल?
दर्द भरे ख्वाबों का दरिया,
तुमने उसमें मुझे छोड़ दिया।
अब तुम बातें नहीं करते,
मुझे अकेला छोड़ कर चले गये।
पर एक दिन फिर मिलेंगे हम,
तेरे बिना मेरी सांसे थम गयी है।
तुम्हारा ख्याल मेरे दिल में है,
बस इस तन्हाई को भूलना है।
सत्यानाशी हुआ मेरा प्यार,
तुम्हें जीने का हक़ नहीं था।
जब तक न हो तुम्हारी यादें,
मेरी हर सांस में तुम हो।
लेकिन इस ब्रेकअप से अब,
मैं अकेला खुद को पा रहा हूँ।
खुदा का शुक्रिया करता हूँ,
किस्मत का शुक्रिया करता हूँ।
जिसने इस ब्रेकअप में,
मुझे मेरी खोई हुई खुशी मिलाई है।
– कवि: अजय
-कवि लोकेश
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