बिछड़ते वक्त की बातें
तेरे बिना ये ज़िंदगी है उजड़ सी गई,
ख्वाबों के महल, अब खंडहर बन के रह गए।
चाहत की आवाज़ें, अब सुनाई नहीं देती,
तेरे मेरे बीच, वो लम्हे बिखर गए।
तेरे पास जो था, वो सब हो चुका ख़त्म,
हंसते-खेले दिन, अब हैं बस एक दास्तान।
क्यों दूर हुए हम, ये सोचूं हर शाम,
तेरे न होने से, दिल में है एक ख़ामोश सन्नाटा।
यादों की परतों में छिपी तेरी खुशबू,
रुख़सती के इस दौर में, कहाँ वो जादू?
एक नया सवेरा, एक नया सफर,
लेकिन दिल के कोने में, तेरा ही है असर।
तू क्या जाने, तेरा नाम लूं हर पल,
बिछड़ने की इस तुमने दी है एक कशमकश।
आगे बढ़ना है, ये जानती हूं मैं,
पर पीछे मुड़कर, तेरा दीदार हर एक लम्हा है।
छोड़ गई मुझे तू, पर अधूरी कहानी में,
तू रहेगी हमेशा, मेरी यादों की कानी में।
वक्त का ये खेल, बिछड़ने की अदाकारी,
पर दिल में तेरा नाम है, ये मेरी तकीकारी।
-कवि लोकेश
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