विराम का पल
तेरे बिना ये दुनिया शून्य सी,
हर खुशी बस खोई खोई सी।
बीते दिन यादों की महफिलों में,
तेरा नाम सुनूं, मगर चुप रहूँ मैं।
चिरागों की रोशनी अब भी बुझी है,
तेरे कदमों की आहट मेरे पास नहीं है।
दिल के वीराने में तेरा साया,
हर रिश्ता अब बस एक पराया।
ख्वाबों में तेरा चेहरा सजे,
फिर भी दिल को ये यादें चुराए।
कभी हंसते थे हम चाँद-सितारों के संग,
अब तो रातों में बस तन्हाई का रंग।
मोहब्बत की वो मीठी बातें,
अब बिछड़ने की दास्तान बन जातीं।
आगे बढ़ना है, ये समझ चुका हूँ,
पर तेरे बिना ये राहें अधूरी लगतीं।
तेरे बिना वक्त को ठहरना आया,
हर पल में तेरा ही एहसास है पाया।
फिर भी सच्चाई ये है कि हमें चलना है,
दिल की कहानी को अब बस भूलना है।
इस दर्द को भी वक्त सहेज लेगा,
नए सवेरे की किरणें नया जीवन देगा।
तू अपनी राह पर, मैं अपनी राह पर,
इस विराम का पल भी अब सह लूँगा।
-कवि लोकेश
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