दिल का दर्द, तुझसे अलग होने का गम,
साथ तेरे था हर खुशी और गुलजार,
पर अब वो सब बस पलकों में हैं आंसू,
तू चला गया, छोड़ कर मुझे अकेले यहाँ।
तेरी यादें सताती हैं, रात भर,
सुलगते हैं दिल के जज़्बात के प्याले,
क्यों किया तू ऐसा, क्यों तोड़ दिया एक ख्वाब,
क्यों बना दिया ये हमारी मोहब्बत का अंत।
रिश्तों का खेल, हमसे भी खेला तू यार,
अब तो हर साँस में बस तेरा ही संग है प्यार,
पर वो संग भी है अब बेमजी, बेफिक्र,
क्योंकि हो गया है हम दोनों का अब फिरे।
चला गया तू, छोड़ कर मुझे तन्हा,
दिल बुरा मान गया, ठहर गई तिशना,
पर आएगा एक दिन वो भी गुज़र जाएगा,
ये दर्द भी, ये गिला भी, काबू में आ जाएगा।
फिर होगा दिल का मिलना, फिर होगा पुराना सफर,
पर ये वक़्त, ये दर्द, ये गम, कुछ यादें देगा इज़हार,
इस ब्रेकअप का दर्द, इस अलविदा का गम,
हुआ ग़ैरों का अब हम, लेकिन हमसे प्यार ही है हम।
-कवि लोकेश
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