जगमगाती दुपहर,
चिड़िया की तरह तुम हो मेरी शान,
आँखों में चमक, दिल में गुल,
तुम हो मेरी मुस्कान, मेरी पहचान।
तुम जैसे वीरों की भावनाओं की तरह,
मेरे मन को जगाते हो हर बार,
सपनों की ऊँचाइयों को छूने के लिए,
तुम हो मेरी मोहक राह।
रात की अंधेरी गलियों में,
तुम्हारी यादों की किरनें होती हैं मेरी मन की दीवार,
तुम से ही है मेरे सपनों की परिभाषा,
तुम हो मेरी जीवन की संगीनी, मेरी आशा का अक्षर।
तुम्हारा साथ है मेरे हर कदम पर,
तुम्हारी प्रेरणा से ऊँचाईयों को छूता हूँ मैं,
तुम हो मेरी ज़िन्दगी की एक नई शुरुआत,
तुम हो मेरी प्रेरणा, मेरा मार्गदर्शन।
आज भी हूँ जिया हुआ तुम्हारे प्यार में,
तुमसे ही है मेरी रुह की गुहार,
तुम हो मेरी ज़िन्दगी की एक नई मिशाल,
तुम हो मेरी प्रेरणा, मेरा अनमोल रत्न।
-कवि लोकेश
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