जगमगाती रात में चमकता सितारा,
जगा देता है मेरे अंदर का प्यारा।
सपने बुजुर्गों के, सपने नौजवानों के,
जिदंगी मिल जाती है एक प्यारी झिलमिलायें।
आग लगा देता है, जागरूक स्वप्न अभिमानी,
जरा सा साथ हो, संजीवनी वायु भी बनने।
हिम्मत सहारा, मनोबल का संगी,
ये है वह ज्ञान का तारा, इन्स्पिरेशन को संजीवनी।
-कवि लोकेश
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