उड़ान भरने की चाह में जगह नहीं थाम।
जीवन की राहों में डूबी मेरी यह कमी है।
मेरे मन को छूने आई है नई रोशनी।
उसकी किरणों ने जी भर के मुझे बानी यह जिन्दगी।
हर कदम पर मिलती है मुझे उसकी मोहब्बत।
जो गम भी भुला देती है, खुशियों का साथ।
उलझी ही रहती थी मेरी सोच के जंजाल में।
उसने सिखाया मुझे, कैसे होता है मन मार्ग।
आकाश की ओर डाली उसने मेरी निगाहें।
मंजिल के करीब ले गयी, मेरे अरमानों की वाहें।
उसकी आवाज सुनकर उठती है मेरे दिल में उमंग।
जैसे हो रहा है उसके संग, घुल रही हो सारी तनहाई।
उसके प्रेरणा से मेरी रौशनी भी बढ़ी है।
अब सेर पर चढ़कर फूलता है मेरा उमंग फिजां।
धन्यवाद है तुम्हारा, ओ मेरी प्रेरणा।
बिना तुम्हारे, कुछ भी नहीं है मेरी आस मंत।
-कवि लोकेश
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