प्रेरणा की बाहर (Prerana Ki Bahar)


ऊँचाइयों की ओर ले चलें हम कदम,
जो देती है हमें महसूस करने की दुनिया का अजब ग़म।

ज़िंदगी की राहों में मेहनत से बढ़ें,
जोश से भर दें दिल को, सपनों को एक नया रंग।

कोई काम छोटा नहीं, जब है उसमें जुनून,
मिलेगा जरूर सफलता, जब करेंगे हम पुरी उम्मीदन।

इंसानियत की सरकार जाग उठे जब,
होगी सबकी आंधी को रोकने की उसको क्षमादान।

हर सुबह नई करें शुरुआत, हर रात को सपनों से भरें,
इंस्पायर होकर बढ़ें हम, पुरी करें खुद की तमन्नाएं।

-कवि लोकेश


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Lokesh T

एक हिंदी कवि के रूप में, मैं अपने शब्दों के माध्यम से जीवन की सुंदरता, जटिलता और बारीकियों को पकड़ने का प्रयास करता हूँ। अभिव्यक्ति की इस यात्रा में मेरे साथ जुड़ें क्योंकि मैं कविता की शक्ति के माध्यम से अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को साझा करता हूँ।

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