तुम्हारे बिना मेरी ज़िन्दगी बिना रंग की
तुम्हारे बिना मेरी रूह एक जंजीर सी
जब तुम ने कहा अलविदा, मेरा दिल तोड़ गया
दर्द ने मेरे सोने के सपने चुरा लिया
तुम्हारे साथ बिताए लम्हे अब यादों में हैं बसे
मेरी आँखों में गीत सरे डूबे, खुशियों के सारे राज ओझले
चाहकर भी नहीं भूल सका मैं तुम्हें
तुम्हारे बिना हर याद से हूं मैं रूबरू
क्या वाकई हमारी कहानी खत्म हो गई है?
या फिर अब भी मिलने की इच्छा में बस हम हैं साथ
लेकिन जैसे ही तुम्हारी याद आती है
मेरा दिल दहल जाता है, और आँखें भर जाती हैं
इस ब्रेकअप का दर्द कैसे कहूं?
कैसे भुला सकूं मैं तुम्हें, ये सवाल मेरे दिल की दहलीज़ से उठता है
लेकिन आज भी दिल में सिर्फ तुम ही हो
कितना भी दफ़न कर लूं, तुम्हे भूल नहीं सकता हूं है
अलविदा, मेरे प्यार का सच्चा इज़हार
मुझे कुछ नहीं कहना, इस ब्रेकअप का विरोध करार
-कवि लोकेश
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