प्रेम का गीत
तारों की छांव में, बातें अनकही,
दिल की धड़कनों में, एक बसी कहनी।
तेरे बिना ये जिधर, लगता अधूरा,
तू ही है मेरा चांद, तू ही है सवेरा।
सपनों में तू आती, चुपके से मुस्काए,
तेरे नाम की खुशबू, हर सुबह लाए।
तेरी हंसी में बसी, मेरे सुख-दुख की बातें,
तेरे साथ हों जब हम, कट जाएं सारी रातें।
बंधन है ये प्यारा, जैसे नदियों का जल,
तू ही मेरी धड़कन, तू ही मेरा पल।
तू मेरा साया, तू मेरा सितारा,
इस प्रेम की दुनिया में, तेरा ही सहारा।
हमसफर बनकर चलना, ये है मेरा ख्वाब,
तेरे साथ की राहें, कोई न हो आबाद।
प्रेम की इस यात्रा में, हर मोड़ पे मिलेंगे,
तू और मैं, सदा यूं ही, सच्चे से बंधेंगे।
-कवि लोकेश
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