प्रेम की मधुर बुनाई
तेरे बिन मन, अधूरा सा लगता,
जितना ज़िंदगी का हर एक पल,
तेरे संग हर लम्हा है सुहाना,
तेरे बिना, ये दिल, क्यों है उदास?
चाँदनी रातों में, तेरा नाम लूं,
तारों की चादर में, तेरा साथ दूं,
तेरे एहसास की खुशबू में रस्ता,
प्रेम की सौगात, सिमीसी पल है।
तेरा हंसना, मेरे दिल की धड़कन,
तेरी बातें, जैसे बहार का गीत,
हर मौसम में, तेरा इंतज़ार करूं,
तेरे साए में, जिंदगी का हर विचार करूं।
गुलाब की नर्म पंखुड़ियों जैसी,
तेरे प्रेम में है, जादुई मिठास,
हाथों में हाथ, चलें तेरे संग,
प्रेम की इस राह में, हो बस हंसना-खिलखिलाना।
कभी बारिश, कभी धूप की छांव,
तेरे साथ हर मोड़ पर, सच्चा एहसास,
इस प्रेम की कहानी में, सदा बहार हो,
तू और मैं, बस एक अद्भुत अहसास।
-कवि लोकेश
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