एक दिन तन्हा खड़ा हो गया,
तुम्हारी दिल की मित्रता टूट गई।
तुम्हारे चेहरे पर था ग़म का आलम,
मेरा दिल भी तुम्हें पुकारता रह गया।
वादे किए थे हमने, साथ जीने के,
पर क्यों तुमने हमें छोड़ दिया।
अब तन्हाई की रातें हैं लम्बी,
बिना तुम्हारे हमारी राहें सूजने लगी।
पर जैसे हमने तुम्हें समझा था,
वैसे ही हम अपनी ज़िन्दगी बिताएंगे।
क्योंकि ब्रेकअप से भी होता है सिखना,
तुम्हारी यादों से हम अपनी मोहब्बत का ईमान ज़माएंगे।
-कवि लोकेश
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