तुम्हारे बिना जीना मुश्किल है,
छूट गए हम, अब तू न खिली है।
दिल के रिश्तों का मोल नहीं था पता,
तुमने तो सब कुछ एक साथ ही धधका।
चाहते थे तुम्हें हम सदा,
पर तुमको तो बस था धोखा।
कहाँ गए हमारे वो दिन,
जब तुमसे मिलने का करते थे इंतजार दिनबादिन।
अब तुमसे मिलने की चाहत कैसे रखें,
जब तुमने हमें छोड़कर किया इतना बेदिल।
कैसे पाएगा दिल इस टूटे हुए रिश्ते का हवाला,
जिसने बना दिया हमें अजनबी का वाहला।
वादे करके तुमने किया हमें दिलासा,
पर वो वादे थे बस किस्सा।
छोड़ गए हमें तुम, अकेले,
बिना किसी सहारे।
पर हमने निभाना खुद को,
दुख और ग़म के साथ अपने मन का भाग्य लिया।
जिओ तुम खुद के लिए खुद से,
हमने खोया खुद को, तुमसे।
जोड़ जो करता था तुमसे हमारा मन,
अब करता है बस तुम्हारा अब भी इंतजार।
तुमसे क्यों नहीं पूछते हम,
क्यों किया तुमने हमें अनजान।
छोड़ गए हमें तुम, अकेले,
बिना किसी सहारे।
पर हमने निभाना खुद को,
दुख और ग़म के साथ अपने मन का भाग्य लिया।
-कवि लोकेश
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