एक दिन आ गया मेहसूस,
तुम्हारी मोहब्बत का अंजाम हुआ दुखद।
हमारी राहों को अलविदा कहना पड़ा,
दिल में छूटते गए सपनों का साथ छूट गया।
तुम्हें मैं छू नहीं पाया,
तुम्हारी यादों से मैं दूर हो गया।
तुम्हारे बिना कैसे जी सकूंगा,
आज तुम मेरे दिल के पास हो गया।
क्यों किया तुमने ऐसा इन्तजाम,
क्यों किया हमारे प्यार का कोई इन्तकाम।
अब तुम मेरी जिंदगी से चले गए,
तुम्हें भूलने की कोशिश करता हूं मैं लेकिन उम्मीद नहीं है कुछ बदलेगा।
जी रहा हूं मैं हर पल तुम्हारे बिना,
पर कुछ खोया सा लगता है मेरा मन।
अब में खुद को संभालूंगा,
इस इम्तिहान से गुजरूंगा मैं और खुद को सजाता रहूंगा।
अलविदा कहकर तुमने तोड़ दिया है दिल,
अब खुद को बचाना होगा मुश्किल।
पर फिर भी देखता हूं जिंदगी को हर मोड़ पर,
क्योंकि तुम्हारे बिना भी जीना सिखाएगी मुझको ये खुदा।।
-कवि लोकेश
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