तुम्हारा जाना, हमारी मोहब्बत का अंत,
दिल को लगा गहरा दर्द, तुम्हारे बिना संत,
क्यों चुराया था तुमने दिल, क्यों छोड़ गए हमें परछाई,
अब तन्हाई की रातों में, बस यादें तेरी रह जाती।
तेरा चला जाना, हमारे सपनों की रुकावट बना,
कैसे भुलाऊं तुझे, बस तेरी यादों में बसा,
मिला करते थे हम, प्यार और दर्द की साथी,
अब छूट गए हैं, हालात किया है मजबूर हमें।
क्या बदल गया था जो तुमने मुझसे प्यार किया था,
क्या भूल गये थे हम, जो तुम्हें कुंवारा पाया था,
मेरे दिल की भावनाओं से क्या, तुमने खेल खेला,
अब मैं तुम्हें नहीं देख सकता, करना पड़ेगा भूलावा।
अलग हो गए हम, गायब हो गए तुम,
कहाँ खो गए हम, कैसे सहूं ये ज़हर हम,
प्यार किया था हमने, धूल में मिल गया वो,
अब सोचते हैं, क्यों किया था तुमने इतना दोष।
खैर, छोड़ गए हो तुम, अब कैसे वापस ला सकते हो फिर,
हाँ, तुम मुझे याद नहीं रहोगे, लेकिन इस खालीं जगह में तुम रहोगे शायद,
छोड़ देते हैं तुम्हें, खुश रहो, मुझे याद रखोगे,
फिर से न मिलेंगे हम, सिर्फ तुम्हारी यादों में बस जाएंगे।
तुम्हारा जाना, हमारी मोहब्बत का अंत,
दिल को लगा गहरा दर्द, तुम्हारे बिना संत,
क्यों चुराया था तुमने दिल, क्यों छोड़ गए हमें परछाई,
अब तन्हाई की रातों में, बस यादें तेरी रह जाती।
-कवि लोकेश
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