तुम्हारी यादें जब आती हैं,
दिल में दर्द छू जाता है।
हमारे बिछड़ने का गम,
फिर से जीने नहीं देता है।
तुम्हारे साथ बिताये लम्हे,
अब लगते हैं तनहा।
कितना सह सकेंगे हम,
इस अलगाव का संघर्ष अब नहीं सहा।
क्यों छोड़ गए हमें तुम,
क्या दोष था हमारा।
अब जीना मुश्किल हो गया,
तनहाई से डर लगने लगा है सहारा।
बुरा नहीं मानते हम,
तुम्हारे निर्णय को।
पर ये सच है कि दर्द,
हमारे दिल को हर दम टक रहेगा साथ को।
बुरा हुआ हमें भी,
तुमको खोकर।
पर जीना सिख रहें हैं हम,
खुद को मजबूत बनाकर।
एक नया सफर शुरू करेंगे हम,
खुद के साथ अब साथ देकर।
तुम्हारी यादों से लड़ते हुए,
नए मौसम की तलाश में आगे बढ़ेंगे हम।
तुम्हारे बिना जी सकेंगे हम,
ये अब सीख लिया है हमने।
दर्द की बारिश में भी,
पर खुद को संभाल लेंगे हम।
-कवि लोकेश
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