ब्रेकअप
ख़ामोशी की चादर ओढ़े, मैं बैठा हूँ अकेला,
तेरे बिना ये दिल मेरा, जैसे वीरान सा मेला।
खुशियों के जो रंग थे, वो अब बिखर गए,
तेरे साथ बिताए लम्हे, गहरे असर गए।
एक मुस्कान में छुपा था, प्यार का एक जहाँ,
अब वो यादें तड़पातीं, दिल में है आसमान।
तू चली गई उन राहों में, जहां मैं ना जाऊँगा,
तेरे बिना सब अधूरा है, मैं बस तन्हा रहूँगा।
शब्दों में जो जादू था, वो अब खो गया,
तेरे साथ की हर एक शाम, अब सन्नाटे में सो गया।
खुश रहने की कोशिश में, मैं खुद को मसलता हूँ,
तेरे बिना इस जिंदगी में, बस मैं ही बिखरता हूँ।
समय के साथ सब कुछ बदलेगा, ये जानता हूँ मैं,
पर तेरे बिना ये दर्द, कहीं ना भुला पाऊँगा मैं।
-कवि लोकेश
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