बिछड़ने की राहें
खिल उठे थे जब हम, सपनों की राह पर,
तेरे संग चलना था, दिल की चाहत पर।
खुशियों की फुहारें, हर लम्हा बिखरती,
अब वो पल भी हैं ग़म, जो ख़ुद को जकड़ती।
जज़्बात की गहराई, अब खो गई कहीं,
तेरे बिना ये दिल, जैसे सूना सा कहीं।
तेरे हंसने की आवाज़, अब चुप है हर ओर,
बिछड़ने की इस रात में, बस है मेरा वो खोखला जोर।
यादों की किताबें, पलटूँ जब भी मैं,
हर पन्ने पर बस तेरा ही नाम लिखूं मैं।
तेरे बिना ये साया, सिहरता सा है,
वक्त के साथ भी, दिल का ग़म जरा नहीं घटा सा है।
दिल की दीवारों पर, तेरा नाम चिपका है,
इन आँसुओं की नदियों में, तेरा चेहरा छिपा है।
कभी तो लौट आना, इन ख्वाबों की राह पर,
वरना ये बिछड़ना, रहेगा सिर्फ़ एक सफर।
हर मोड़ पर तेरा इंतज़ार करते हैं हम,
इस दिल की वीरानी में, खोने लगे हैं हम।
लेकिन ज़िंदगी के रंग, अब भी तो बने हैं,
तेरी यादों के साए, अब भी साथ हैं, ये सच है।
-कवि लोकेश
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