बिछड़ने का दर्द
तू जो चला गया, दिल में खालीपन रह गया,
हर याद में, एक आँसू, हर सांस में तन्हाई रह गया।
खुशियों के पल, जैसे मिट्टी में मिल गए,
तेरे बिना ये शहर, मुझको वीरान सा लगने लगा।
चांदनी रातें अब, कहीं खो गई हैं,
तेरी हंसी की खनक, बस मौसमों में रो गई है।
वादा था जो एक-दूसरे का साथ निभाएंगे,
अब उस वादे की छाया में, दर्द के साए आएंगे।
तेरे बिना दिल में, उठती हैं लहरें,
ख्वाबों की ताजगी में, बस रह जाती हैं बेरें।
वक़्त की रेत पर, लिखी मेरी यह कहानी,
बिछड़ने का यह नज़ारा, कभी न होगा आसान।
लेकिन एक दिन, मैं मुस्कुराहट से जिएंगे,
इस टूटे दिल को भी, फिर से हम संजीवनी देंगे।
-कवि लोकेश
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