तोड़ दिया तुमने, वो रेशमी सपना,
जो साथ-साथ चलते थे, वो प्यार भरा सफर था।
हंसते थे जब तुम, दिल में बसी थी बहार,
अब सुनसान है राहें, बस यादें हैं बेकार।
तुमसे मिली थी सुबह की पहली रोशनी,
अब छा गई है रात, अंधेरों की कश्ती।
हर लम्हा तुम्हारा, बिछड़ने का सफर,
खामोशी में गूंजे हैं, अधूरे से ये चिंतन।
तुमने कहा था, सदा रहोगे मेरा साया,
अब ये तन्हाई, जैसे बहार का साया।
तोड़ दिया ख्वाबों को, जहां प्यार था सच्चा,
दिल की इस बगिया में, अब सिर्फ है कच्चा।
भूल नहीं पाती, वो मीठी बातें तुम्हारी,
फिर भी वक्त की लहरों में, डूब गई सारी।
चल पड़े हैं हम, अब अलग-अलग राहों पर,
जो दिल से जुदा हुए, वो अब हैं अनजाने सफर।
माना कि यह दर्द है, पर खुद को मैं पाऊं,
जी लूंगी मैं फिर, खुद को फिर से सजाऊं।
तोड़ दिया तुमने, पर मैं टूटने नहीं दूंगी,
इस दिल में छुपी हैं, नई शुरुआत की धुनें।
-कवि लोकेश
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