जीवन के सफर में अड़चनें आती हैं,
पर नजरों में उम्मीदों की रोशनी जगाती है।
साहस से चलना, हो सपनों की पहचान,
उसी सपने को प्रेरित कहलाता अज्ञान।
हर कठिनाई से हार कर ना टालें,
जीवन के सात समंदर पार कर हम कहलाएं।
आगे बढ़ना है तो खुद को आत्मशक्ति से भरें,
उसी में है हमारी जीत की रहड़।
क्या रुक कर हम जीत पाएंगे,
जब हर चुनौती को आत्मविश्वास से निभाएंगे।
इसी विचार में छुपी है हमारी शक्ति,
जो अविरल जलसा और प्रेरणा की भूमि।
सोचें, सपनों को सच करने की दिशा में,
और बनीलाखि में सफलता के मिथ को देखें।
इस प्रेरणा के संग, हर मुश्किल का सामना करें,
और उसके आगे हमेशा आत्मसमर्पण करें।
इस प्रेरणा से हार जाएंगे हम नहीं,
क्योंकि हमारे अंदर झलकता है असीम।
इस प्रेरणा की बात सफलता की जिंदगी होगी,
और जीत की मिलेगी उससे सजीव गमी।
तो चलो, आज से अपने सपनों की पहचान करें,
और प्रेरणा से हमेशा होते रहें जुदाई करें।
-कवि लोकेश
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