प्रेरणा
चढ़ पहाड़, ये देख नए आसमान,
हर ओर बिखरे हैं सपनों के जहान।
कदम बढ़ा, मत हो डगमगाती,
हर मुश्किल से आगे, खुद को चुपचाप सिखाती।
चन्द्रमा की चाँदनी, तारे की रोशनी,
हर अंधेरे में छुपी एक नई कहानी।
संघर्ष का दीप जलाकर रखो,
हर आलस्य को पीछे छोड़ चलो।
जितने मुश्किल हों, उतनी मज़बूती,
हर धड़कन में बसी हो ताजगी और खूबसूरती।
हर गिरने पर उठने का है जज़्बा,
सपनों के पीछे दौड़ो, यही है सबका सब्बा।
आओ, खुद को पहचानें और आगे बढ़ें,
हर दिन एक नया सबक, न हार मानें।
ये जीवन है एक खूबसूरत यात्रा,
प्रेरणा की रौशनी बनो, हो चलती सर्द या गर्मी की धार।
-कवि लोकेश
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