बढ़ते चलो, कभी ना रुकना,
सपनों के पीछे, तुम बस दौड़ना।
कितनी ही मुश्किलें, राह में आएँगी,
मन की शक्ति से, सब हट जाएंगी।
चढ़ते पहाड़ों पर, हो जब तुम ठान,
हर चुनौती को, करो तुम आसान।
असफलता से ना, कभी तुम डरना,
हर गिरने पर, उठने का सबक लेना।
सूरज की किरणें, जो झलकती हैं,
उम्मीद की राहें, जो बताती हैं।
जोश और जुनून से, भरा रहे मन,
हर दिन नए सपनों का मिले सृजन।
खुद पर विश्वास रखो, खुद को पहचानो,
तब हर मुश्किल में, तुम पाएंगे ताज।
हर नया सवेरा, लाएगा नया रंग,
इंस्पीरेशन की बगिया में खिलता नया संग।
-कवि लोकेश
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