तुमने कहा था तुम नहीं छोड़ोगे मुझे,
पर फिर भी ये दिल रोया है तुम्हारे लिए।
अब तन्हाई में बस ये आंसू बहाना है,
तुम्हारी यादों में हर रोज़ मरना है।
क्यूँ नहीं समझ पाया मैं तुम्हारी बातें,
क्यूँ नहीं जान पाया मैं तुम्हारी बातें।
गुजरी हमारी रातें अब सिर्फ ख्वाबों में,
तुम्हारी यादों में हर वक़्त जलना है।
मेरी खुशियाँ अब बातों में ही रह गईं,
तुम्हारे चले जाने के बाद इतना तन्हा है।
लेकिन अब नहीं रोना, नहीं जलना है,
अब मैं अपने आप से जीना सीख रहा हूँ।
तुम्हारे लिए जो कुछ भी कह रहा हूँ,
मुझे तुमसे दूर होने का बिलकुल नहीं डर है।
-कवि लोकेश
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