तुम्हें छोड़कर मेरे जीवन का सब कुछ अधूरा है,
दिल की हर धड़कन अब तुम्हें धुंधली स्मृति सहारा है।
तेरी यादों का संगीत दिल को छू जाता है,
लेकिन तेरी ख़ता ने क्यों हमें तोड़ दिया दिल का तारा है।
जैसे बादल आसमान से गुजर जाते हैं,
उसी तरह तू भी मेरे जीवन से गुजर गया है।
क्या ज़माने का इंतज़ार करूँ या तेरी यादों में उलझा रहूँ,
ये सवाल दर्द देता है, मगर मझबूर कर रहा है।
मेरी भावनाओं का कोई मोल नहीं है,
तुम्हारे बिना मेरा जीवन खोज का मौका है।
स्वीकार करना पड़ेगा, तुम मेरे लिए अमान्य हो,
इस जीवन में मेरा तो कोई मायने नहीं है।
तुम्हारे बिना, मेरी धड़कनों में एक सुन्नता है,
ब्रेकअप की ऐसी मनमर्जी, क्या हम फिर से मिलेंगे वो तीसरी।
-कवि लोकेश
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