Breakup Poems

विरह कविता

टूटते सपने

बिछड़ने का दर्द तू जो चला गया, दिल में खालीपन रह गया, हर याद में, एक आँसू, हर सांस में तन्हाई रह गया। खुशियों के पल, जैसे मिट्टी में मिल गए, तेरे बिना ये शहर, मुझको वीरान सा लगने लगा। चांदनी रातें अब, कहीं खो गई हैं, तेरी हंसी की खनक, बस मौसमों में रो […]

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विरह कविता

दर्द का खामोश सफर

विराम पंक्ति में, कुछ तो कह दूं, तुझसे बिछड़ के, मैं खुद को खो दूं। आँखों की चमक, अब धुंधली हो गई, तेरे बिना ये जिंदगी अंधेरी हो गई। खुशियों की बातें, अब यादों में हैं बस, तेरे बिना हर पल, लगता है अधूरा कोई हिस्सा। खुशबू तेरी, अब केवल एक ख्वाब है, दिल में […]

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विरह कविता

विछोह की अधूरी कहानी

बिछड़ने की रात चाँदनी रातों में, तेरे साथ गुजरे पल, अब सूनापन है इधर, दिल है जैसे खोया जल। खुशबू तेरी यादों की, चुराए हर एक सांस, फिर भी ये वक्त की रेत, उड़ा ले गई सब भंस। तेरी हँसी की गूंज, अब कानों में नहीं, तेरे बिना ये राहें, लागे हैं अंजान कहीं। आँखों […]

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विरह कविता

Title: विराम की धूप

बिछड़ने की रुत तेरी यादों का साया, अब किया मैंने छोड़, दिल के तिरछे रास्ते, हैं अब वीरान बोर। ख्वाबों में जो धुंधलाते, रंग दिन बीते, उन सपनों की किताब को, आज मैंने सील दी। हर लम्हा था जैसे, एक मीठा जहर, अब वो नफरत सी लगती, ये जो था प्यार अपने पर। फूलों की […]

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विरह कविता

बिछड़न की यादें

विछोड़ का दर्द तोड़कर रेशमी धागे, तुम चले गए, ख्वाबों की पुरानी किताबें, बिना पन्नों के रह गईं। संगीत की वो मीठी धुन, अब शोर बन गई, तेरे बिना ये खुशियों की बगिया, वीरान सी रह गई। तेरे संग बिताए लम्हे, अब यादों में गूंजते, हर एक मुस्कान में, तेरे अक्स समाए हुए। फिर भी, […]

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विरह कविता

बिछड़ने कीलों में छुपा दर्द

विराम छोटे-छोटे सपने, अब धुंधले हैं, तेरे बिना ये पल, रहस्य भरे हैं। जब तू था साथ, हर गली थी रोशन, अब तो ये साए, बस हैं उदासी की बातें। खुशियों के छाँव में, जब तू मुस्काता, हर आहट में तेरा नाम गुनगुनाता। फिर क्यों आया वो दिन, तट पर तू चला गया, सपनों की […]

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विरह कविता

विराम की चुप्पी

विराम का पल बिछड़ते वक्त की धुन में, सपनों का साज बिखर गया, खामोश शाम की चादर में, दिल का हर रंग उतर गया। तेरे साथ की जो बातें थीं, अब वो यादें हैं चुभती, जाने क्यों ये आंखें बरसती, हर खुशी अब अधूरी लगती। तू था मेरा आसमान, मेरी हर एक दुआ का मान, […]

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विरह कविता

टूटे सपनों की दास्तान

बिछड़ने का ये पल आया है, दिल में दर्द का सैलाब छाया है। ख्वाबों की रंगीन दुनिया टूटी, छटपटाते खयालों में अंधेरा छाया है। तेरे बिना ये फासले बढ़ते, हर शाम की चाँदनी अब उदासी लुटती। हंसते-खेलते वो दिन अब यादों में हैं, उन यादों में खोकर, मैं अब क्या ढूंढूं? तेरी बातें, तेरी हंसी, […]

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विरह कविता

विराम का दर्द

बिछड़ने का दर्द तारों की चाँदनी में, वो वादा न रहा, खुशियों के साए में, वो सपना न रहा। तेरे साथ गुज़रे पल, अब यादों के हैं, दिल की सड़कों पर, बस आँसू के हैं। खुद को खोकर तुझमें, जीया था मैंने, अब तन्हाई में छुपा, मेरा ये साया है। तेरे हंसने की गूंज, अब […]

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विरह कविता

टूटे सपनों का सिलसिला

टूटना तारों की चादर में, बिखर गया सपना, तेरी मेरी प्रेम कहानी, अब रह गई खामोशी का कश्मकश। दिल की गहराइयों में, सुन-सुन के तेरा नाम, पर अब वो लम्हें, हैं जैसे जादू का बर्बाद काम। रास्ते अलग हो गए, जुड़ना था जो कभी, छोड़ गए साथ, हम दोनों ही अब अजनबी। तेरी मुस्कान में […]

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