विरह कविता

विरह कविता

टूटते रिश्ते की चुभन

बिछड़ने का दर्द चली गई तुम, मेरे ख्वाबों की रानी, सपनों की दुनिया, अब लगती वीरानी। हर लम्हा तेरे बिना तन्हा सा लगे, दिल में उमड़े जज़्बात, बस चुपके रहे। तेरी हंसी की गूंज, अब सुनाई नहीं देती, तेरे बिना ये दुनिया, अधूरी सी लगती। छोटी-मोटी बातें, वो प्यारे से लम्हे, सादगी में बसी थी, […]

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विरह कविता

विरह के रंग

यहाँ एक कविता है ब्रेकअप पर: तुमसे मिली थी, सपनों की रेशमी डोरी, अब वो लम्हे हैं, बस एक अधूरी कहानी। चने हुए थे हम, साथ चलने की राह पर, अब तन्हाई में, बट रहा है ये अफसाना। तेरी आँखों में था चाँदनी का तारा, लेकिन धीरे-धीरे, सब कुछ हो गया धुंधला। हंसते थे हम, […]

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विरह कविता

बिछड़ने की खामोशी

बिछड़ते सपने तुमसे मिले थे जब ख़्वाबों में, दिल की धड़कन ने गाया था गीत, अब राहें जुदा हैं, ख़ामोशी का आलम, वो प्यार भरे पल, बस रह गए हैं मीत। तुम्हारी हंसी की गूंज अब, खामोशी में गुम हो गई, जिन आँखों में देखा था मैंने, उन्हें अब एक अजनबी लगी। कभी जो थे […]

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विरह कविता

टूटते रिश्तों की सदाएं

बिछड़ने की परछाइयाँ तुमसे मिले थे जब हम, खुशियों का था हर मौसम, सपनों की महक से भरा, हर लम्हा जैसे एक कुसुम। पर अब वे दिन हैं दूर, सिर्फ यादों का है दौर, तेरे बिना हर पल अधूरा, जिन्दगी का ये नया सफर। तेरे साए में ढूंढा मैंने, खुशियों का हर एक रंग, पर […]

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विरह कविता

विराम के क्षण

टूटना दिल की गहराइयों में एक दर्द छुपा है, तू कहीं और है, ये खामोशी सज़ा है। वो हंसी, वो बातें, अब सिर्फ एक याद हैं, तेरे बिना ये दीवाना, बस खामोश रात है। ख्वाबों में आता है तेरा मधुर चेहरा, फिर वो सपनों का बाग़, है वीरान अब मेरा। तेरी आहटों में बसी जो […]

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विरह कविता

विराम के पल

बिछड़ने की रात चाँद की चाँदनी में, दिल की बात छुपी, तेरे संग बिताए, वो सारे पल रुकी। हंसी के जज़्बात, अब क्यों यूं बिखरे, तू और मैं, जैसे दो बादल बिछड़े। तेरी यादों की खुशबू, अब तल्ख हो गई, हर ख्वाब अधूरा है, हर खुशियाँ खो गई। तूने जो वादे किए, वो सब झूठे […]

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विरह कविता

विराम पत्र: बिछड़े दिल की कहानी

बिछड़ने का दर्द तेरे बिना हर शाम अधूरी है, ख्वाबों की मूरत अब बेचारी है। तेरी यादों के साये में जीते हैं, हर सांस में तेरा नाम बसा हुआ है। तू चली गई जब से, ये दिल है सुनसान, वो लम्हे, वो बातें, सब हैं अब वीरान। खुशियों का राग अब अपने पर奏 नहीं, वो […]

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विरह कविता

विराम का पल

बिछड़ने का दर्द तेरी यादों की हर एक लहर, दिल में उठती है एक नज़र। सपनों की दुनिया बिखर गई, आँखों में आंसू, मन में सिहर। तेरे संग बिताए पल, अब बस एक गहरा खलिश। कहाँ खा गया वो प्यार, जो था एक वक्त की मिठास। दिल के जज़्बात अब सूने, खामोश हैं, जैसे चाँद […]

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विरह कविता

दिल की दरारें

विराम की थी रात चाँद की चाँदनी में, तन्हाई की बातें, दिल में उठते जज़्बात, अब कैसे हैं राहतें। वो ख़ुशबू, वो हंसी, सब खो गया है, एक अधूरी प्रेम कहानी, बस रो गया है। सपनों की रंगीनियाँ, अब हैं धुंधली, तेरे बिना ये राहें, हैं क्यों इतनी सुनसान। जो वादे किए थे, अब सब […]

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विरह कविता

विराम की राहें

बिछड़ने का दर्द तेरे बिना ये रात है वीरान, दिलो में अब है सिर्फ़ पश्चाताप। ख्वाबों में जो थे रंगीन, अब हैं बस सुलगते सवाल, क्यूं? तेरी हंसी की गूंज अब सुनाई नहीं देती, हर मोड़ पर बस तेरी यादें हैं जकड़ी। दिल के कोने में छुपी हैं बातें, जो कभी निभाई थीं, अब हैं […]

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