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विदाई का पल

दिल में छुपे अरमानों की बात कहूँ,

तेरे बिन मेरी तन्हाई का क्या हाल कहूँ।

वो मीठी यादें, वो हंसी भरी बातें,

अब सब सून पड़े, जैसे खामोश रातें।

ख्वाबों में जो तू था, वो रंग चुराया,

इस दिल के आँगन में, तूने क्यों बसाया।

शब्दों की कमी, इश्क की ये दूरी,

क्यों न समझे तू, दिल की ये मजबूरी।

आँखों में बसी तेरा चेहरा अब धुंधला,

छूने की चाहत में, बस दिल ही रह गया खाली।

तेरी खुशबू में जो थी, अब वो नहीं है,

ये दिल तो तन्हा है, पर मैं तो अभी जी रहा हूँ।

जा, सुकून से तेरा रास्ता चुने,

मैं अपने ग़मों में अब छलके आँसू समेटूँ।

यादों की छाँव में, तन्हाई का साथ है,

फिर भी दिल की गहराइयों में, तेरा ही एहसास है।

-कवि लोकेश


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Lokesh T

एक हिंदी कवि के रूप में, मैं अपने शब्दों के माध्यम से जीवन की सुंदरता, जटिलता और बारीकियों को पकड़ने का प्रयास करता हूँ। अभिव्यक्ति की इस यात्रा में मेरे साथ जुड़ें क्योंकि मैं कविता की शक्ति के माध्यम से अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को साझा करता हूँ।

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