Day: June 13, 2025

विरह कविता

विराम का ग़म

विराम तेरी यादों का साया, अब तो भारी लगता है, हर खुशी का पल, जैसे अब अधूरी लगती है। सपनों के रंगीन महल, अब उजड़ गए हैं, तेरे बिना यह जीवन, जैसे सूना सा लगता है। ख़्वाबों में जो तू था, वो अब बिछड़ गया, दिल के कोनों में, अब बस दर्द बसा है। हंसते-हंसते […]

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विरह कविता

विराम का व्यथित गीत

बिछड़ने का ये पल है कठिन, ख्वाबों का ताना-बाना बिखर गया। तेरे बिना जिया है अधूरा, हर याद में तेरे चेहरे का नूर है छिपा। हंसते-खिलखिलाते दिन थे पहले, अब सन्नाटे में गूंजते हैं ग़म। दिल के कोने में तेरा नाम लिखा, पर अब वो नाम भी है जैसे चुराना ग़म। तन्हाई की राहों पर […]

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प्रेम कविता

प्रेम की अनोखी धुन

प्रेम का अहसास तारों से जड़ी, यह रात सुहानी, दिल में बसी है तेरी कहानी। हर सांस में तेरा नाम बसा है, तेरे बिना ये मन अधूरा सा है। तेरे साथ बिताए वो पल याद हैं, जिनमें हर ख़ुशी, हर जज़्बात हैं। तेरी हंसी से खिलते हैं चेहरे, तेरे बिना ये जीवन अधूरा नीरस है। […]

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