Day: June 5, 2025

विरह कविता

विरासत में मिलती खामोशी

विराम तेरे साथ में जो सपने थे, अब वो सब ख्वाबों में बिखरे हैं। दिल की गहराइयों में जख्म हैं, तेरे बिना अब हम कितने अकेले हैं। साथ जो चले थे, वो राहें अब सूनी, तेरी हंसी की धुन, अब सूनसान है। हर लम्हा तेरा याद आता है, हर मोड़ पर बस तेरा संकेत बाकी […]

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प्रेम कविता

प्रेम की रंगीन बेलें

प्रेम की गहराई तेरे बिना ये दुनिया अधूरी, तेरे साथ हर लम्हा है नागिन की नूरी। तेरी हंसी से सजे हैं मेरे सपने, तेरे नज़र से ही मिलते हैं ये सब रंगीले चंपने। तेरी बातों में छिपा है जादू, तेरे बिन लगता है जैसे हर दिन है काजू। जब तू पास होती है, सब कुछ […]

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विरह कविता

विराम की रेखा

अलविदा दिल की धड़कनें अब थम गईं, तेरे बिना ये राहें सिमट गईं। ख्वाबों में बसी थी तेरी हंसी, अब वो यादें भी मुझसे कट गईं। हाथों में हाथ था, छूकर भी, अब लगे जैसे दूरियां भरी हैं। कारवां में तेरा नाम था, अब ये लम्हे हैं, जो अधूरी कहती हैं। हर शाम की तन्हाई […]

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विरह कविता

बिछड़न की चंदन

बिछड़ने की क़िस्मत तेरे साथ की हर याद, अब अदृश्य है, दिल में जो जज़्बात थे, सब तन्हा-तन्हा हैं। आँखों में वो ख्वाब, अब धुंधले से हो गए, तेरे बिना मेरा जहाँ, वीरान सा हो गया। व promises के रंग, अब फीके लगते हैं, वो हँसते पल, जैसे बादलों में खोते हैं। जिन लम्हों ने […]

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