Day: April 21, 2025

विरह कविता

अब तन्हाई का किरदार

तुम चले गए, छोड़कर मुझे अकेला, मेरे दिल में बसी है अब तन्हाई की वेला। तुम्हारी यादें आती हैं मुझे सताने, दर्द भरी यादों को दिल में छुपाने। क्या कहो दिल को, कैसे समझाऊं, तुम्हारे बिना मैं कैसे जी पाऊं। सजी रही थी तेरे लिए मेरी ये दुनिया, बिना तुम्हारे, क्या करूं मैं आज की […]

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विरह कविता

विचोड़: दिल की तोड़ने की कहानी

तूने मेरे दिल को तोड़ दिया, खुदाया मुझे फिर से जोड़ दिया। जब तक तू था मेरे साथ, हर सुबह थी मेरे लिए नयी रात। पर फिर एक दिन आया वो समय, जिसने मेरे जीवन में चार चाँद लगाय। तू चली गई अपनी राह, छोड़ गई मुझे अकेला यहाँ। कोई चाहे जितनी कोशिश करे, पर […]

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