वीरानी का आलम (Veerani Ka Alam) – The Atmosphere of Desolation

ब्रेकअप

जिन्दगी की राह पर एक मोड़ आया,

तेरे साथ बिताया हर पल, यादों का साया।

हंसी की गूंज थी, अब चुप्पी है छायी,

दिल की चुभन में, क्यों ये जख्म गहरा आया?

पलकों पे रखा था तुझे, सपनों का नगर,

अब वो सपने देख, दिल की धड़कन बिखर।

साथ जो थे कभी, अब हैं दूरिया,

तेरे बिना हर लम्हा, लगता है अधूरा।

यादों की लहरें, क्यों तरसाती हैं,

हर मुस्कान में, तेरी कमी छिपाती हैं।

चाहे छोड़ दिया तूने, पर दिल ना भूला,

तेरे बिना ये जिंदगी, बंजर सा फीका सूना।

लेकिन अब सीखूँगा, खुद को फिर से पाया,

हर दर्द को सहूँगा, और नया सवेरा लाया।

खुद को संवारूँगा, जख्म भरूँगा,

तेरे बिना सही, मगर फिर भी मुस्कुराऊँगा।

-कवि लोकेश


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Lokesh T

एक हिंदी कवि के रूप में, मैं अपने शब्दों के माध्यम से जीवन की सुंदरता, जटिलता और बारीकियों को पकड़ने का प्रयास करता हूँ। अभिव्यक्ति की इस यात्रा में मेरे साथ जुड़ें क्योंकि मैं कविता की शक्ति के माध्यम से अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को साझा करता हूँ।

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