विराम के बाद

बिछड़ना

तेरे बिना अब हर एक साँस भारी है,

खामोशियों में तेरी यादें encircle हैं।

खुद को सँवारे, पर मन में तू बसी है,

तन्हाई की रात, दिल की ये कहानी सुनाएगी।

कभी हंसते थे, अब आँसुओं की बरसात,

खुद को मिटा दें, पर नहीं होती राहत।

तेरी मुस्कान में छिपी थी जो ख़ुशबू,

आज वो यादें हैं, बस गहरी सिसकियाँ।

पलकों पर रखा, जो सपना सुहाना था,

अब वो एक अधूरा, टूटा सा फसाना है।

हर मोड़ पर तेरा हाथ थामना,

अब खालीपन में खुद से ही बातें करना।

बिछड़कर भी तूने सिखाई है जो ख़ुशी,

उसका एहसास कराती है हर गहरी ख़ुशी।

दिल की गहराइयों में तेरा नाम लिखा है,

पर सच है ये, कि अब तू नहीं किसी का।

रास्ते अलग हैं, मंजिलें भी दूर,

पर यादों के दीवानों का मिलना भी तो नूर।

जिंदगी की किताब में एक पन्ना और सही,

तेरे बिना ये सफर, बस एक क्लांत कहानी है।

-कवि लोकेश


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Lokesh T

एक हिंदी कवि के रूप में, मैं अपने शब्दों के माध्यम से जीवन की सुंदरता, जटिलता और बारीकियों को पकड़ने का प्रयास करता हूँ। अभिव्यक्ति की इस यात्रा में मेरे साथ जुड़ें क्योंकि मैं कविता की शक्ति के माध्यम से अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को साझा करता हूँ।

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