विराम का पल
बिछड़ते वक्त की धुन में,
सपनों का साज बिखर गया,
खामोश शाम की चादर में,
दिल का हर रंग उतर गया।
तेरे साथ की जो बातें थीं,
अब वो यादें हैं चुभती,
जाने क्यों ये आंखें बरसती,
हर खुशी अब अधूरी लगती।
तू था मेरा आसमान,
मेरी हर एक दुआ का मान,
अब जो तेरा नाम लूं,
दिल में गूंजे केवल विरान।
हमने साथ देखे थे सितारे,
खुले आसमान में जो थे सारे,
अब वो तारे भी हैं गुमशुदा,
रात की चादर ने छिपा लिया।
कभी जो हाथ थामे थे,
अब वो राहें हैं बिछड़ी,
जिंदगी के इस मोड़ पर,
तेरे बिना सब कुछ है ठिठकी।
जुदाई की इस भारी खरी,
दिल की धड़कन अब है अधूरी,
लेकिन फिर भी मैं चलूंगा,
नई राह पर, नई धुन से जुड़ूंगा।
अलविदा कह दिया मैंने,
पर यादों में तेरा चेहरा छिपा,
एक नया सफर शुरू होगा,
बस मुझे खुद से सजग रहना है।
-कवि लोकेश
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