विराम
तोड़ दिया तुमने वो सपना,
जो पलकों पर रखा था मैंने।
तेरे साथ की हर मुस्कान में,
आज एक गहरा दुख छिपा है।
वो बातें, वो हंसी, वो पल,
अब बस हैं यादों के सिलसिले।
चाँद की रोशनी में जब चलूँ,
तेरे बिना सब अधूरा लगे।
दिल की धड़कन का संगीत,
अब सुनाई नहीं देता।
तेरे जाने के बाद,
हर एक गीत शून्य है।
क्यों जाते हो तुम यूँ,
जैसे सफर अधूरा छोड़ दिया?
मोहब्बत के इस सफर में,
हमने दर्द का एक नया रंग लिया।
पर जीवन तो आगे बढ़ता है,
इस गम को अपने साथ रखेंगे।
हर आंसू में छिपी है ताकत,
हर टूटना एक नई शुरुआत है।
अब चलना है मुझे अकेले,
तेरे बिना भी मुस्कुराना है।
खुद को फिर से पाकर,
नए सिरे से जलना है।
-कवि लोकेश
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